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1. महत्वपूर्ण जानकारियों हेतु संपर्क अधिकारी कौन हैं ?
धारा 50 की योजनाओ की भूमियों एवं संबंधित विषयों के संबंध में - मुख्य वास्तु नियोजक/संबंधित कार्यपालन यंत्री विक्रित अविक्रित संपत्तियों एवं संबंधित विषयों की जानकारी - विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी प्रचलित / प्रस्तावित योजनाओं एवं संबंधित विषयों की जानकारी - संबंधित कार्यपालन यंत्री लेखा एवं संबंधित विषयों जानकारी - लेखाधिकारी स्थापना एवं संबंधित विषयों जानकारी - प्रशासकीय अधिकारी सामान्य जानकारी - जन संपर्क अधिकारी
2. प्राधिकरण द्वारा भू अर्जन के मोटे तौर पर क्या विकल्प हैं तथा इस विकल्पों से संबंधित क्या प्रक्रियाएं की जाती हैं ?
भू अर्जन के मुख्यतया दो विकल्प हैं
1 भू स्वामी एवं प्राधिकरण के मध्य करार के माध्यम से गणना पश्चात विकसित भूखंड के रूप में मुआवजा देय होगा ।
2 भू अर्जन अधिनियम के अंतर्गत कलेक्टर द्वारा निर्धारित मुआवजा भुगतान कर।
3. प्राधिकरण की योजना में किन एवं किस प्रकार की भूमियों को छूट प्राप्त है ?
 धारा 50(1) में प्रकाशन के पूर्व यदि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा अभिन्यास अनुमोदित किया जा चुका हो तो इस प्रकार की भूमि को योजना से छूट प्राप्त हो सकेगी । अन्य किसी भी परिस्थिति में किसी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है ।
4. प्राधिकरण की प्रचलित /प्रस्तावित योजनाओं का कहां अवलोकन किया जा सकता है ?
 प्राधिकरण की प्रचलित / प्रस्तावित योजनाओं का अवलोकन वास्तुविद शाखा एवं संबंधित कार्यपालय यंत्री के  कार्यालय  में किया जा सकता है ।
5. मैं प्राधिकरण से ही संपत्ति क्यों क्रय करूं जबकि अन्य बिल्डरों / कालोनाइजरों द्वारा कम मूल्य पर अच्छी संपत्ति क्रय करने का विकल्प मौजूद है ?
 भोपाल विकास प्राधिकरण द्वारा विगत 35 वर्षों में भोपाल के रहवासियों को मकान एवं प्लाट उपलब्ध कराया जाकर उत्कृष्ट सेवां दी गई हैं । प्राधिकरण द्वारा विकसित कालोनियों की व्ययन की गई संपत्ति स्वामित्व संबंधी विवादों से पूर्णतया मुक्त होती है तथा मध्य प्रदेश शासन का निकाय होने से प्राधिकरण जनता के प्रति जवाबदेह है । कालोनियों का सुनियोजित विकास मानक अनुरूप किया जाता है तथा योजनाओं में जल प्रदाय, सीवर निकासी, सरफेस ड्रेन एवं अन्य विकास कार्य कराया जाकर सर्व सुविधा युक्त आवासीय कालोनियों एवं व्यवसायिक संपत्ति का निर्माण कार्य प्राधिकरण द्वारा कराया जाता है । इसके अतिरिक्त प्राधिकरण की आवासीय संपत्ति स्वयं वित्तीय योजनांतर्गत क्रय करने पर ब्याज मुक्त किश्तों की सुविधा भी दी जाती है ।
6. मैं प्राधिकरण से संपत्ति क्रय करना चाहता हूं इसके लिए मुझे क्या करना होगा ?
 संपत्ति का समाचार पत्रों एवं वेबसाइट पर विज्ञापन/सूचना जारी होने के पश्चात लेखा शाखा एवं निर्धारित बैंक से फार्म प्राप्त किया जाकर निर्धारित अवधि के भीतर पंजीयन राशि, फोटोग्राफ एवं शपथ पत्र संलग्न कर संपत्ति हेतु आवेदन किया जा सकता है । ई डबल्यू एस एवं एल आई जी सपंत्ति क्रय करने हेतु आय प्रमाण पत्र तथा आरक्षित संपत्ति क्रय करने हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य है ।
7.  एक संपत्ति के लिए एक से अधिक पंजीयन प्राप्त होने पर क्या प्रक्रिया है ?
एक संपत्ति के एक से अधिक पंजीयन प्राप्त होने पर लाटरी द्वारा आवंटियों का चयन किया जाता है ।
8.  लाटरी सिस्टम में प्लाट आवंटन की क्या प्रक्रिया है ?
लाटरी के पूर्व समाचार पत्रों एवं वेबसाइट में विज्ञापन/सूचना जारी कर संबंधितों को सूचित किया जाता है । निर्धारित दिनांक को उपस्थित व्यक्तियों के सामने लाटरी किया जाकर आवंटियों का चयन किया जाता है ।
9. क्या लाटरी में संपत्ति का क्रमांक आवंटन होने के पश्चात संपत्ति के क्रमांक में परिवर्तन किया जा सकता है ?
संपत्ति की उपलब्धता के आधार पर प्रचलित भूमि मूल्य का 5 प्रतिशत परिवर्तन शुल्क लिया जाकर संपत्ति का क्रमांक परिवर्तन किया जा सकता है ।
10. पंजीयन समाप्त करने / आवंटन निरस्त करने में क्या मुझे कोई शुल्क देना होगा ? यदि हां तो कितना एवं किस दर से ?
क)   पंजीयन समाप्त करने पर प्रचलित नियमानुसार राशि काटी जाती है ।
ख)  निर्धारित अवधि में किश्त की राशि जमा न करने की स्थिति में संपत्ति का आवंटन निरस्त कर जमा पंजीयन राशि राजसात कर ली जाती है ।
ग)  व्यावसायिक संपत्ति के मामले में आफर के समय जमा की गई संपूर्ण राशि राजसात कर ली जाती है ।
11. मुझे कार्नर प्लाट आवंटित हुआ है , इससे लगी हुई अतिरिक्त भूमि क्या मुझे आवंटित हो सकती है ?
यदि हां तो क्या प्रक्रिया है ? कार्नर प्लाट से लगी हुई अतिरिक्त भूमि का आकार यदि नियमित भूखंड के आकार से कम है तो उसका आवंटन (रोड एवं ओपेन स्पेस छोड़कर) प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मूल्य प्राप्त कर नियमानुसार किया जा सकता है ।
12. एक व्यक्ति प्राधिकरण से कितनी संपत्तियां अर्जित कर सकता है ?
एक व्यक्ति अपने एवं अपनी पत्नी के संयुक्त / एकल नाम पर अधिकतम दो संपत्तियां अर्जित कर सकता है ।
13. क्या लीज की राशि एक मुश्त जमा की जा सकती है ?
यदि 10 वर्ष का लीज रेन्ट एक मुश्त जमा किया जाता है तो शेष लीज अवधि का लीज रेन्ट देय नहीं होगा ।
14. प्रति वर्ष लीज जमा करने की कोई अंतिम माह एवं दिनांक नियत है ?
लीज जमा करने का अंतिम दिनांक प्रति वर्ष 01 जून तक होता है तत्पश्चात विलंब अवधि पर ब्याज देय होता है ।
15. निर्धारित अवधि तक लीज की राशि जमा न कर पाने पर कोई ब्याज देय होगा ?
यदि हां तो किस दर से ? निर्धारित अवधि तक लीज की राशि जमा न करने पर 16.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज देय होता है ।
16. पंजीयन पश्चात प्राधिकरण द्वारा राशि प्राप्त करने की क्या प्रक्रिया है
क) पंजीयन पश्चात प्राधिकरण द्वारा आवंटन आदेश जारी किया जाता है ।
ख) आवंटन आदेश में संपत्ति के निर्धारित मूल्य के अनुसार किश्तों की सूचना आवंटी को दी जाती है ।
ग) आवंटन आदेश में उल्लेखित किश्तें जमा होने के पश्चात संपत्ति का अंतिम मूल्य एवं अंतिम किश्त जमा कराए जाने हेतु आवंटी को पृथक से सूचित किया जाता है ।
घ) निर्धारित मूल्य जमा कराए जाने के एवं लीज डीड पंजीकृत करने के पश्चात आवंटी को आधिपत्य दिया जाता है । 
17. क्या निर्मित संपत्ति के नियोजन में परिवर्तन किया जा सकता है ?
 यदि हां तो क्या प्रक्रिया होगी ? ऐसे विषयों मंे प्राधिकरण की अनुमति अनिवार्य है । भवन के अंदर हितग्राही द्वारा प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त करने के पश्चात ही परिवर्तन कराया जा सकता है । अन्य स्थिति में ऐसा परिवर्तन करना प्रतिबंधित है तथा किए जाने पर लीज की शर्तों का उल्लंघन होने से नियमों के अनुसार पेनाल्टी एवं लीज निरस्त की जाने की कार्यवाही की जा सकती है ।
18. संपत्ति में आरक्षण का कोटा क्या है ?
 अनुसूचित जाति - 10 प्रतिशत अनुसूचित जन जाति -15 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग - 6 प्रतिशत प्राधिकरण कर्मचारी - 2 प्रतिशत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी - 4 प्रतिशत सैनिक / भू पू सैनिक - 2 प्रतिशत बुद्धिजीवी / श्रमजीवी पत्रकार एवं कलाकार- 3 प्रतिशत मा सांसद / विधायक - 18 प्रतिशत (केवल एच आई जी ) शारीरिक विकलांग - 4 प्रतिशत महिला (सामान्य कोटा) - सामान्य कोटे का 5 प्रतिशत महिला (अनुसूचित जाति / जन जाति) - निर्धारित कोटे का 5 प्रतिशत 
19. संपत्ति हेतु बैंक से लोन प्राप्त में भोपाल विकास प्राधिकरण से क्या सहायता प्राप्त हो सकती है ?
 संपत्ति क्रय किये जाने हेतु आवंटियों को पूर्ण सहयोग प्राधिकरण द्वारा किया जाता है । प्राधिकरण द्वारा आवंटी के आवेदन पर संपत्ति बैंक में बंधक रखने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है एवं आवश्यकतानुसार त्रिपक्षीय अनुबंध भी किया जाता है । बैंक को प्राधिकरण की संपत्ति पर लोन स्वीकृत करने पर किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आती है तथा किसी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर प्राधिकरण द्वारा अपने क्षेत्राधिकार के अंदर तत्परता से निदान किया जाता है । 
20. भोपाल विकास प्राधिकरण द्वारा क्रय किए गए भवनों को अन्य व्यक्ति को किस प्रकार हस्तांतरित किया जा सकता है ?
 प्राधिकरण द्वारा निर्मित संपत्ति को 1 वर्ष तक किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता । 1 वर्ष पश्चात आवेदन किये जाने पर प्राधिकरण द्वारा निर्धारित नामांतरण शुल्क जमा कराया जाकर हस्तांतरण कराया जा सकता है ।
21. क्या निर्मित संपत्ति के भू उपयोग/निर्धारित उपयोग में परिवर्तन किया जा सकता है यदि हां तो किस प्रकार ?
 निर्मित संपत्ति के भू उपयोग/निर्धारित उपयोग में किसी का परिवर्तन लीज की शर्तों का उल्लंघन माना जाता है । नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा जारी मास्टर प्लान अनुसार ही संपत्ति का भू उपयोग/निर्धारित उपयोग निर्धारित होता है । इस प्रकार के परिवर्तन हेतु प्राधिकरण द्वारा आवंटियों को सूचित किया जाता है तथा निर्धारित शूल्क जमा कराए जाने के पश्चात ही भू उपयोग/निर्धारित उपयोग में परिवर्तन किया जाता है ।
22. बहु मंजलीय भवनों के रख रखाव का दायित्व किस पर है ?
 संपत्ति विक्रित होने के पश्चात बहुमंजलीय भवनों का रखरखाव प्राधिकरण द्वारा रहवासियों की समिति को हस्तान्तरित कर दिया जाता है जिसके पश्चात रखरखाव की जवाबदारी समिति की होती है ।
23.  योजनाओं के हितग्राहियों द्वारा रहवासी समिति का गठन किया जाना आवश्यक है ?
लीज की शर्तों के अनुसार हितग्राहियों द्वारा रहवासी समिति का गठन किया जाना आवश्यक है ।
24. भोपाल विकास प्राधिकरण द्वारा निम्न आय वर्ग / कमजोर वर्ग हेतु कौन कौन सी योजनाएं प्रस्तावित हैं ?
प्राधिकरण द्वारा कमजोर आय वर्ग के लोगों हेतु यथासंभव उन्हीं की झुग्गियों के स्थल पर जे एन एन यू आर एम योजना के अंतर्गत 5157 आवासों का निर्माण किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के अंतर्गत निम्न आय वर्ग / कमजोर आय वर्ग हेतु आगामी 3 वर्षों में 10000 आवासों के निर्माण की योजना है ।